कोलारस-शिवपुरी. शिवपुरी जिले के कोलारस स्थित ग्राम कुमरौआ में एक मां अपने घर में दो मासूम बेटों का खाना खिलाने के लिए इंतजार करती रही, उधर दोनो बच्चें जरा सी लापरवाही के चलते तालाब में डूब गए। दो घंटे तक जब बच्चें घर नही आए तो माता-पिता तालाब किनारे पहुंचे, बच्चों के कपड़े तो एक कोने में सूखते मिले, लेकिन उन कपड़ों को पहनने वाले दोनों मासूमों के शव पानी के अंदर मिले। अपने दोनों बच्चों की मौत के बाद मां बदहवास हालत में है, वह बार-बार अपने मृत बच्चों को ङ्क्षजदा करने की कोशिशें करती रही, उसको यकीन ही नहीं हो रहा कि अब दुनिया में उसको मां बोलने वाला कोई नहीं बचा।

जानकारी के मुताबिक कुमरौआ निवासी विनोद धाकड़ के दो बेटे रितिक (10) व ङ्क्षप्रस (7 ) दोनो बुधवार सुबह 10 बजे बोर पर नहाने के लिए गए थे, लेकिन यहां बिजली न होने से बोर बंद था। इसके बाद दोनो बच्चे पास ही स्थित तालाब पर नहाने पहुंच गए। यहां पर पहले दोनों बच्चों ने अपने कपड़े धोए और फिर पानी में कूद गए। तालाब का पानी बच्चों के हिसाब से गहरा था, इसलिए दोनों बच्चों की कुछ ही देर में पानी में डूबकर मौत हो गई। इधर दोनों बच्चों की मां गौरा अपने बच्चों का घर पर खाना खिलाने के लिए इंतजार कर रही थी। जब १२ बजे तक बच्चे घर नहीं आए तो गौरा अपने पति विनोद को लेकर तालाब पर पहुंची। उधर घटना की सूचना के बाद पुलिस ने बच्चों को शवों को पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

सूखते मिले बच्चों को कपड़े

माता पिता को तालाब पर एक तरफ बच्चों के कपड़े तो सूखते हुए मिले, लेकिन बच्चों का कोई पता नहीं चल पा रहा था। पास स्थित मंदिर पर बैठे कुछ साधुओं से गौरा ने बच्चों के बारे में पूछा तो साधुओं ने भी बताया कि कुछ देर पहले बच्चों की आवाज तो आ रही थी, लेकिन अब उनको भी कुछ नहीं पता। इसके बाद कुछ संदेह हुआ तो गांव के कुछ युवक तालाब के पानी में उतरे तो एक बेटा रितिक मिला, जिसे तुरंत पानी में से बाहर निकाला गया, फिर दूसरे की तलाश की तो वह भी चंद मिनटों में मिल गया। दोनों बच्चों को पानी में से बाहर निकालकर परिजनो व ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बच्चों के शरीर में से पानी निकालने की कोशिश की लेकिन जब कोई हलचल नही हुई तो परिजन सीधे दोनों को लेकर अस्पताल पहुंचे।

यहां पर डॉक्टरों ने दोनो बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मामले की सूचना पर से एसडीओपी विजय यादव सहित पुलिस बल मौके पर पहुंचा। दोनों शवों के पीएम कराकर उनका अंतिम संस्कार कराया गया। घटना के बाद से मां गौरा सहित परिजनो का रो-रोकर बुरा हाल बना हुआ है। गौरा बार-बार यही बोलते हुए गुमशुम हो जाती है कि अब उससे मां कौन बोलेगा, भगवान ने उसका सबकुछ छीन लिया। अब वह किसके सहारे जीवन काटेगी।

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