पुनीत श्रीवास्तव.ग्वालियर. अंचल में बंदूक मर्दों के लिए रसूख से कम नहीं हैं, लेकिन बाहुबल का शौक अब महिलाओं को भी रास आने लगा है। इनमें कुछ को रसूख का शौक विरासत में मिला है तो ज्यादातर ने शौक को पूरा करने के लिए बंदूक टांगी है। हालांकि शस्त्रधारी बनी महिलाएं बंदूक को रसूख नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए जरूरी मानती हैं। सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से जिले में 33,106 शस्त्र लाइसेंसधारक हैं। इस फेहरिस्त में 225 महिलाओं के नाम भी हैं।

लॉकडाउन में डिमांड

कोरोना काल के दो साल में 1362 लाइसेंस बने। यह गिनती पिछले साल में बने कुल 3656 लाइसेंस में सबसे ज्यादा रही है।

बंदूक रसूख नहीं आत्मबल बढ़ाती है

भाजपा नेत्री विद्यादेवी कौरव कहती हैं उनके पास भी 12 बोर बंदूक है। वह इसे आत्मबल मानती हैं। महिलाएं घर में अकेली होती हैं तो उन्हें डर नहीं होता। इसके अलावा शस्त्रधारक महिलाएं समाज में दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनती हैं। कौरव कहती हैं कि पुरुष भले शस्त्र को स्टेटस सिंबल मानते हों, लेकिन महिलाएं उसका दिखावा नहीं करतीं। जिले में सैकड़ों में महिलाओं के पास शस्त्र हैं लेकिन किसी महिला को कंधे पर बंदूक टांगकर घूमते नहीं देखा होगा। महिलाओं के पास शस्त्र होने से उनकी और परिवार की सुरक्षा रहती है। शस्त्रधारी महिलाओं में भाजपा की पूर्व मंत्री सहित, कुछ नेत्रियां, गृहणियां और व्यापार से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं।

यह हैं हथियारों के कुल आंकड़े
वर्ष शस्त्र लाइसेंस

2015-440
2016-584
2017-412
2018-273
2019-585
2020-791
2021-571

नोट-जबकि 2015 से पहले 29450 शस्त्र लाइसेंस जारी हो चुके थे। उसके बाद 7 साल में 3656 लोगों के लाइसेंस बने हैं। इनमें • महिलाएं भी शामिल हैं।

वोट के बदले लाइसेंस की डिमांड
जिले के कुछ इलाकों में चुनाव में शस्त्र लाइसेंस भी हार-जीत में अहम कारण रहते हैं। पूर्व विधायक का कहना है कि घाटीगांव, मोहना में कुछ बरस पहले डाकुओं की वजह से बंदूक लोगों में सुरक्षा का जरिया थी, लेकिन डाकुओं के सफाए के बाद अब इस इलाके में बंदूक शौक बन गई हैं। यहां तक की लोग चुनाव में वोट मांगने वाले नेताओं से यह डिमांड तक करते हैं उनका बंदूक का लाइसेंस बनेगा या नहीं। अब इन गिनती में महिलाएं भी शामिल हो रही हैं।

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हर साल 600 लाइसेंसधारी

-आंकड़ों के मुताबिक पिछले 7 साल में शस्त्र लाइसेंसधारियों की गिनती तेजी से बढ़ी है। हर साल करीब 600 लाइसेंसधारियों का इजाफा हुआ है।

-पुलिस अधीक्षक दफ्तर की आम्र्स शाखा के कर्मचारी कहते हैं कि शस्त्र लाइसेंस के हर दिन करीब 20 से ज्यादा आवेदन आते हैं।

-इनमें उन लोगों को शस्त्र लाइसेंस दिया जाता है जिन्हें जरूरत है। शस्त्र की चाहत रखने वाले लाइसेंस के लिए तमाम सिफारिशें और ऐड़ी चोटी का जोर लगाते हैं।

– पिछले 7 साल में करीब 3656 लोगों को प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस दिए हैं।

 

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सुरक्षा के लिए महिलाएं भी शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर रही हैं। उन महिलाओं की गिनती भी ज्यादा है जिनके पति के नाम से शस्त्र लाइसेंस थे। लेकिन उनका निधन हो चुका है। अब उनके शस्त्र महिलाएं अपने नाम चाहती हैं इसलिए लाइसेंस के लिए आवेदन करती हैं।
-अमित सांघी, एसपी ग्वालियर

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