शिवपुरी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने जिले को बुरी तरह अपनी चपेट में लिया। स्थिति यह तब बनी कि शिवपुरी मध्यप्रदेश के सबसे संक्रमित शहरों शुमार हो गया। यहां पर संक्रमण दर 40 फीसद तक पहुंच गई, जो अन्य जिलों के मुकाबले काफी अधिक थी। यहां तक की ग्वालियर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी संक्रमण शिवपुरी के मुकाबले कम था। पिछले दो-तीन दिनों से कोरोना के आंकड़ों में राहत है, लेकिन अभी भी जिले में करीब 2150 सक्रिय मरीज हैं। जिले में संक्रमण फैलाने के मामले में शहरी क्षेत्र का ही हाथ रहा। जबकि ग्रामीण अंचल में संक्रमण पहुंचा, लेकिन उसे सही समय पर रोक लिया गया। आंकड़ों की बात करें तो सक्रिय मरीजों का 60 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में हैं, जबकि जिले की महज 20 फीसद आबादी ही शहर में रहती है। शेष 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचल में रहती है, जिनमें कोरोना के सक्रिय मरीज 40 फीसद ही हैं। जिले की 55 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतें ग्रीन जोन में शामिल हैं। यहां पर संक्रमण न प्रवेश करे, इसलिए आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित की हुई है। वर्तमान में भी ग्रामीण लोग शहरी क्षेत्र के निवासियों से अधिक सतर्कता दिखा रहे हैं। शहरों में जहां लोग कर्फ्यू में बाहर निकलने से बाज नहीं आ रहे हैं तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह से सन्नााटा पसरा हुआ है। वहां पर नियमों का पालन कराने के लिए न पुलिस की जरूरत है और न ही प्रशासन की। ग्रामीण खुद अपनी ड्यूटी तय कर नियमों का पालन करा रहे हैं।

ग्रामीणों का स्वेच्छा से कोरोना कर्फ्यू

कोरोना संक्रमण फैलते समय सबसे बड़ा डर यही था कि यदि यह ग्रामीण अंचल में फैला तो नियंत्रण करना मुश्किल होगा। शुरुआत में करैरा, कोलारस और पोहरी में संक्रमण फैला भी। करैरा में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई। कोलारस में भी बड़ी संख्या में मरीज मिले और मृत्यु भी हुई। इसके बाद तहसीलों से गांव-गांव तक संक्रमण फैलने से रोकने के लिए ग्राम पंचायतों ने स्वैच्छिक कोरोना कर्फ्यू लगाया और गांव के प्रवेश के रास्तों को पूरी तरह से सील कर दिया। गांव के बाहर के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया, चाहे किसी का रिश्तेदार आए या फिर कोई दूसरा जरूरी काम हो। सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में ही आवाजाही की अनुमति रही, वह भी सिर्फ गांव के निवासी को ही रही।

प्रति आबादी संक्रमित में 10 गुना का फर्क

जिले की ग्रामीण अंचल की आबादी करीब 17 लाख है, जिसमें सक्रिय मरीज 766 ही हैं। यानी हर 2200 वें व्यक्ति पर एक संक्रमित है। जबकि शहरी क्षेत्र की बात करें तो यहां पर दो लाख की आबादी पर 700 से ज्यादा मरीज हैं, जिनमें 250वें व्यक्ति पर एक संक्रमित है। जिले में अभी सक्रिय मरीजों की संख्या करीब 2150 है। इसमें 40 फीसद ग्रामीण अंचल में है। शेष 60 प्रतिशत शिवपुरी शहरी और शिवपुरी ग्रामीण के हैं।

इनका कहना है

गांव में क्राइसिस मैनेजमेंट के समूह सही काम कर रहे हैं। सरपंच, सचिव, रोजगार सहायकों के साथ हमारा बड़ा अमला वहां पर संक्रमण रोकने में जुटा हुआ है। हमारी कोशिश है कि ग्रीन जोन पंचायतों की संख्या और बढ़े। ग्रामीण क्षेत्र में कम संक्रमण फैलने का यह भी कारण है कि गांव का आदमी अपने घर में ही है। वह फिजूल में घर से नहीं निकल रहा है। ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश मार्ग को बंद कर रखा है। वह लोग शादियां व अन्य धार्मिक आयोजन भी नहीं कर रहे हैं।

– एचपी वर्मा, सीईओ, जिला पंचायत, शिवपुरी।

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